Getting My अहंकार की क्षणिक प्रकृति: विनम्रता का एक पाठ To Work

अहम् अपने-आपको आत्मा समझता है। अहम् क्या है? ‘कै’। आत्मा क्या है? ‘मैं’। पर अहम् अपने-आपको आत्मा समझता है, यही गड़बड़ हो गई है। तो अहम् जब अपने-आपको आत्मा समझता है तो सोचता है कि अगर अहम् हटा तो आत्मा भी हट जाएगी। नहीं बाबा, अहम् हटा तो आत्मा नहीं हटेगी, अहम् हटा तो अहम् ही हटेगा। ‘कै’ हटेगा तो ‘मैं’

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